प्रेस वक्तव्य: संविधान से ऊपर शरीयत थोपने की देश विरोधी मानसिकता से बाज आएं कट्टरपंथी उलेमा: विजय शंकर तिवारी
नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा घोषित “संविधान एवं शरीयत संरक्षण आंदोलन” पर विश्व हिंदू परिषद ने अपना कड़ा विरोध जताया है। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सह मंत्री श्री विजय शंकर तिवारी ने आज कहा कि भारत एक संविधानबद्ध राष्ट्र है। यहाँ संविधान सर्वोच्च है, शरीयत नहीं। जो संगठन संविधान की दुहाई देते हुए शरीयत को उसके समानांतर खड़ा करते हैं, वे देश की एकता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। श्री तिवारी ने मुस्लिम समाज से सीधे कहा कि भारत के मुसलमान भारतीय नागरिक हैं। उन्हें संविधान द्वारा प्रदत्त सभी अधिकार प्राप्त हैं। परंतु नागरिकता के साथ कर्तव्य भी जुड़े हैं। देश के कानून को स्वीकार करना, राष्ट्र प्रतीकों का सम्मान करना और समान नागरिक संहिता की भावना को समझना भी उसी नागरिकता का हिस्सा है। बोर्ड बार-बार यह चित्र प्रस्तुत कर रहा है कि मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है, मस्जिद-मदरसे निशाने पर हैं, बुलडोजर केवल उनके खिलाफ चल रहा है और वंदे मातरम् उनके धर्म पर हमला है। यह अधूरी और भ्रामक तस्वीर है। अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अदालती आदेशों की अवहेलना किसी धर्म की रक्षा नहीं होती। कानून सब पर समान लागू होता है। अवैध को वैध बताकर पीड़ित बनना उचित नहीं। समान नागरिक संहिता का विरोध करके बोर्ड वास्तव में अपने ही समाज की महिलाओं के समान अधिकारों का विरोध कर रहा है। बहुविवाह, असमान विरासत और पर्सनल लॉ के ऐसे प्रावधान, जो संविधान के समानता सिद्धांत से टकराते हैं, उन्हें अनंतकाल तक चलाने की जिद देश के हित में नहीं है। तीन तलाक पर न्यायालय और संसद ने जो कदम उठाए, वे न्याय के पक्ष में थे। उसी दिशा को आगे बढ़ाने का नाम UCC है। वंदे मातरम् स्वतंत्रता संग्राम का गीत है। राष्ट्र के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना किसी धर्म का अपमान नहीं है। जो लोग राष्ट्र गीत का सम्मान नहीं कर सकते, वे संविधान की बात करने का नैतिक अधिकार खो देते हैं। श्री तिवारी ने मुस्लिम समाज के जागरूक वर्ग से कहा कि भय का वातावरण अपने नेताओं के वक्तव्यों से स्वयं मत फैलाइए। देश में मुसलमानों के जीवन, संपत्ति और पूजास्थलों की रक्षा संविधान से होती है, शरीयत से नहीं। जो कट्टरपंथी नेता संविधान और शरीयत को एक पंक्ति में लिखकर आंदोलन चलाने की धमकी दे रहे हैं, वे बताएं कि यदि दोनों में टकराव हो तो किसे मानेंगे? संविधान को या शरीयत को? विश्व हिंदू परिषद का स्पष्ट संदेश है— 1. भारत में किसी भी समुदाय का पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। 2. समान नागरिक संहिता राष्ट्रीय एकता और वास्तविक समानता की माँग है। 3. अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर कार्रवाई मजहबी आधार पर नहीं रोकी जा सकती। 4. वंदे मातरम् का सम्मान देशभक्ति है, किसी मजहब का विरोध नहीं। 5. स्वयं को पीड़ित बताकर देश को बाँटने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। श्री तिवारी ने कहा कि हिंदू समाज किसी के वैध धार्मिक आचरण का विरोधी नहीं है। परंतु संविधान के ऊपर शरीयत को थोपने का प्रयास राष्ट्र विरुद्ध है। संविधान स्वीकार कीजिए, कानून का पालन कीजिए, राष्ट्र का सम्मान कीजिए—यही सच्चा संरक्षण है। विश्व हिंदू परिषद शांति, संवाद और संविधान की सर्वोच्चता के पक्ष में दृढ़ता से खड़ी है। परंतु संविधान को कमजोर करने वाले किसी भी अभियान का विरोध भी उतनी ही दृढ़ता से करेगी।
https://youtu.be/9OJf04uVb30?si=cfOc2IVAVfXHKNDc
